एक एक बुंद रक्त जलाकार
अंधकार को मिटाया
मानवता की शपथ लेकर
एक दुसरे को समझाया
भाग कोरोना हमारे देश से
हमने कितने प्राण गंवाए
देखो हमने दिप जलाएं |
कर रहा तू हमे कमजोर
उलझन मे पडी जीवन- मृत्यु की डोर
हमारे घर मे हम कैद है
गिन रहे सब निशा और भोर
निद्रिस्त पडी है चारो दिशाएं
देखो हमने दिप जलाएं |
कोरोना तू बडा मायावी तू बडा घमंडी
नही चलेगी तेरी चाल पाखंडी
रचले तू जयचंद के खेल
नही बिठा पायेगा भारत मे मेल
हम कहते है छाती फुलाएं
देखो हमने दिप जलाएं |
कवि देविदास के सच्चे बोल
मोदी जी का करो ना मोल
कोरोना को हराकर बजायेंगे
भारतभूमी पर विजय का ढोल
चाहे मेरी खाल से पताका सजाएँ
देखो हमने दिप जलाएं |
कवि
श्री देविदास भिका पाटील
श्रॉफ विद्यालय नंदुरबार
संपर्क 8459591887