विज्ञान शिक्षक प्रविण साळुके यांनी लिहली कोरोना वर कविता
नवापूर प्रतिनिधी
विज्ञान शिक्षक हे प्रयोग व गणित यातच माहिर असतात परंतु विज्ञान शिक्षक हे सुंदर साहीत्यीक देखील असतात याचेच उदाहरण म्हणून नवापूर आदिवासी सेवा सहाय्यक संस्था संचलीत अनुदानित आश्रमशाळा बिलमांजरे येथील विज्ञान शिक्षक प्रविण साळुंके यांनी कोरोना या विषयावर हिंदी भाषेत कविता लिहिली असुन या कोरोणामुळे लोकांना काय सोसावे लागत याचे वर्णन त्यांनी केले आहे .. -------- *कोरोणा* ---------
"कोरोना" की एक ऐसी लहर आयी
पल मै वह कहर बसा गयी
सजाये थे सपने अपनो से
पल भर मै वह घर के अंदर ले गयी
बडे संभालकर पाला था जिन्होने
वो माँ बाप को कोरोना दबा गयी
मासूम सा एक बच्चा
धरती पर वह छोड गयी
दिल दहला देने वाला है यह मंजर
जिंदगी मै कभी नही घर के अंदर
घर वृक्ष सामान को छोडकर
वह इन्सान को घर मै दबा गयी
सहाय्यता मदत के हाथ बहुत आये
मगर वह हाथ सहारा कहा
जो दिल के आँसू को पोछ सके
आने वाला समय मै
कोरोना से निडरता से सम्मान करे
पोलिस,डाँक्टरोंका सम्मान करे
सरकार द्वारा दिये सूचनाओका पालन करे
यही करम तय करेंगे
दुनियाँ मै हैसीयत तेरी
कर मदत उन्हे....
जिनको है जरुरत तेरी
प्रविण सुरेश साळुंके
माध्यमिक शिक्षक
अनुदानित माध्यमिक आश्रम शाळा बिलमांजरे ता.नवापुर